महत्वपूर्ण धारा: रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम में बिजली आपूर्ति
रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम को पूर्ण विश्वसनीयता की आवश्यकता होती है, इसलिए मजबूत विद्युत आपूर्ति सुरक्षित संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये सिस्टम नेटवर्क में महत्वपूर्ण कार्यों के अनुरूप विभिन्न प्रकार के विद्युत स्रोतों का उपयोग करते हैं।
संचालन और मुख्य विशेषताएं:
1. व्यापक इनपुट और उच्च दक्षता: SMPS ग्रिड वोल्टेज में होने वाले महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव (AC 85V–264V) को संभाल सकते हैं। ये AC इनपुट को DC में परिवर्तित करते हैं और फ़िल्टर करते हैं, फिर उच्च-आवृत्ति PWM स्विचिंग (MOSFETs के माध्यम से) का उपयोग करके पल्स उत्पन्न करते हैं। एक ट्रांसफ़ॉर्मर आवश्यक पृथक्करण प्रदान करते हुए वोल्टेज को समायोजित करता है, जिससे 90% से अधिक दक्षता पर सटीक और स्थिर DC आउटपुट (24V, 48V, 110V) प्राप्त होते हैं, जिससे हानि और ऊष्मा न्यूनतम होती है।
2. स्थिर आउटपुट और सुरक्षा: एक फीडबैक लूप (PWM IC + ऑप्टोकपलर) आउटपुट की लगातार निगरानी करता है और इनपुट या लोड में बदलाव के बावजूद स्थिरता (
1) ओवरवोल्टेज/अंडरवोल्टेज सुरक्षा (ओवीपी/यूवीपी): ग्रिड की अनियमितताओं से बचाव के उपाय।
2) ओवरकरंट/शॉर्ट-सर्किट सुरक्षा (OCP/SCP): आउटपुट में खराबी होने पर करंट को सीमित करता है या सिस्टम को बंद कर देता है।
3) अतितापमान संरक्षण (ओटीपी): तापीय खतरों से बचाता है।
4) सर्ज प्रोटेक्शन: बिजली गिरने या बिजली के झटके से होने वाले नुकसान को कम करता है।
3. अतिरेक एवं बैकअप: महत्वपूर्ण प्रणालियाँ (इंटर लॉकिंग, ट्रेन नियंत्रण) निर्बाध फ़ेलओवर (
प्राथमिक अनुप्रयोग और विद्युत स्रोत:
1. ट्रैक के किनारे लगे उपकरण: इसमें ट्रैक सर्किट (ट्रेन की उपस्थिति का पता लगाने वाले), सिग्नल (स्थिति प्रदर्शित करने वाले) और पॉइंट (स्विच) मशीन जैसे महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं। ये मुख्य रूप से निम्नलिखित पर संचालित होते हैं। 24V या 48V डीसी, से व्युत्पन्न:
1) स्थानीय विद्युत रूपांतरण: ट्रैक के किनारे स्थित केसों में एसी मेन पावर (अक्सर 110V/230V एसी सिंगल-फेज या 400V एसी थ्री-फेज) की आपूर्ति की जाती है। विद्युत आपूर्ति इकाइयाँ (पीएसयू)ये पीएसयू एसी को आवश्यक स्थिर, विनियमित डीसी में परिवर्तित करते हैं, जिसमें फ़िल्टरिंग और सर्ज प्रोटेक्शन शामिल है।
2) बैकअप बैटरियां: महत्वपूर्ण रूप से, वाल्व-नियंत्रित लेड-एसिड (वीआरएलए) बैटरियां ये PSU सिस्टम में एकीकृत होते हैं। ये AC मेन सप्लाई फेल होने पर तत्काल बैकअप पावर प्रदान करते हैं, जिससे घंटों तक निरंतर संचालन सुनिश्चित होता है, ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही होती है या सेक्शन को फेल-सेफ स्थिति में लाया जा सकता है। यह DC पावर वितरण अक्सर रेडियल होता है, जिसमें अलग-अलग उपकरणों को फ्यूज्ड सप्लाई दी जाती है।
2. नियंत्रण केंद्र और इंटरलॉकिंग: सिग्नलिंग सिस्टम के "मस्तिष्क" (जैसे, रिले इंटरलॉकिंग, कंप्यूटर-आधारित इंटरलॉकिंग/आरबीसी, कंट्रोल पैनल/वर्कस्टेशन) को स्थिर बिजली की आवश्यकता होती है। वे आमतौर पर निम्नलिखित का उपयोग करते हैं:
1) निर्बाध विद्युत आपूर्ति (यूपीएस): ये सिस्टम एसी मेन इनपुट लेते हैं और उसे डीसी में परिवर्तित करके बड़ी मात्रा में उपकरणों को चार्ज करते हैं। बैटरी बैंक बैटरी को (अक्सर VRLA) वोल्टेज पर चलाया जाता है, और फिर संवेदनशील नियंत्रण उपकरणों के लिए इसे वापस AC (अक्सर 230V AC) में परिवर्तित किया जाता है। मुख्य बिजली आपूर्ति बाधित होने पर बैटरी निर्बाध बैकअप प्रदान करती हैं।
2) अनावश्यक फ़ीड: महत्वपूर्ण केंद्रों में अक्सर यूपीएस के सक्रिय होने से पहले बेहतर मजबूती के लिए अलग-अलग सबस्टेशनों से दोहरी स्वतंत्र एसी मेन फीड होती है।
सार: रेलवे सिग्नलिंग पावर सप्लाई उच्च-स्तरीय प्रणाली है। यह कच्चे एसी मेन को ट्रैक के किनारे लगे उपकरणों के लिए सटीक रूप से विनियमित डीसी में परिवर्तित करती है और नियंत्रण केंद्रों के लिए परिष्कृत यूपीएस/बैटरी प्रणालियों का उपयोग करती है। सभी स्तरों पर बैटरी बैकअप का व्यापक समावेश सर्वोपरि है, जो बिजली की गड़बड़ी और रुकावटों के दौरान भी सिस्टम के सही ढंग से काम करने की गारंटी देता है, जिससे रेलवे सुरक्षा को सीधा समर्थन मिलता है। यह बहुस्तरीय दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि सूचना और नियंत्रण का महत्वपूर्ण प्रवाह कभी न रुके।

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